शौक बन गया कैरियर कैमरा ही मेरी पहचान…

जशपूर ✍️जितेन्द्र गुप्ता

फोटोग्राफी से आकाश सोनी को मिली पहचान, शौक बन गया कैरियर कैमरा ही मेरी पहचान:आकाश सोनी

विश्व फोटोग्राफी दिवस पर अपने विचार रखते हुए जशपुर के युवा फोटोग्राफर आकाश सोनी ने कहा की हम सभी फोटोग्राफर के लिए आज विशेष दिन है। युवाओं एवम फोटोग्राफर लवर के लिये कैमरा एक ऐसी रचना जिसकी बदौलत आज हम बीते हुए कल को संजो के अपने वर्तमान में देख सकते हैं.

फोटोग्राफर आकाश सोनी ने कहा कि जो भी फोटोग्राफी वीडियोग्राफी को निम्नस्तर का कार्य समझ कर अपने बच्चों को सिर्फ ये माइंड सेट कर देते है, कि ये एक शौक का काम हैं इससे भविष्य को सही नही किया जा सकता।
उन तमाम परिजनों से मैं कहना चाहूंगा फोटोग्राफी आपको अपनी खुद की पहचान दिलाता हैं, आपको लाइफस्टाइल सवारने का मौका देता हैं, एक लक्ज़री लाइफ स्टाइल से रूबरू करवाता हैं, एक अच्छी इनकम सोर्स दिलाता हैं। जिससे आप अपने परिवार का पालन पोषण के साथ अपनी सपनो की चीज़ों को खरीदने में सामर्थ रखते हैं।

उन्होंने कहा कि आज अगर संसार से कैमरा खत्म कर दिया जाए तो फ़िल्म बननी खत्म हो जाएगी स्मृति का नामोनिशान मिट जाएगा भविष्य की कल्पना नही कर पाएंगे कैमरा सिर्फ कैमरा नही ये एक जरूरत का साधन हैं इसे सिर्फ मनोरंजन का साधन समझना गलत हैं।

आकाश सोनी ने बताया कि मैं बचपन से कैमरा मेरी हॉबी की प्रथम स्थान में रहा हैं,वो इस लिए की जब पहले रील वाले कैमरा का फोटो धूल कर घर आता था तो फ़ोटो तो देखते ही थे लेकिन जो नेगेटिव होती थी जिसे हम रील कहते थे उसे बचपन मे हम लाइट के ऊपर कर के देखते थे उस टाइम से मन मे था ये बहुत रोचक वस्तु और मेरा झुकाव बढ़ता गया, जबतक कैमरा का समझ पाता तब तक उस समय छोटा वाला डिजीटल कैमरे ने जगह बना चुका था लेकिन एक बार रील वाले कैमरा से मेरा सामना हुआ वो भी मेरे घर की शादी में मैंने जब पहेली बार सटर बटन रिलीज किया और फ्लैश चमका उस समय का अनुभव बवाल था पूरा सिस्टम हिल गया मेरा समय बीतता गया मैंने छोटे कैमरा से फ़ोटो ले लेकर सौख पूरा किया कभी दोस्तो के कैमरा से कभी किसी का फिर मैंने ठान लिया मुझे लेना मैंने पैसे जोड़ना चालू किया मुझे 2 साल लग गए जमा करने में मैंने दृण निश्चय कर लिया था ली मुझे लेना हैं और मैंने इसे हासिल किया इस लिए नही की मैं पैसे कमाने के लिए इसे ले रहा हूँ मैं अपने जशपुर को रेस्प्रेसेंट करने के लिए लिया, फिर कारवां चालू हुआ जशपुर की फोटोग्राफी की जैसे मन वैसे लेता गया सुरवात में लोगो ने सोचा भी नही था क्या हैं क्या नहीं लेकिन 2014 से निस्वार्थ भाव से अपने जशपुरवासी को अपने कल्चर अपना नेचर अपने कैमरे से दिखता गया लोग जुड़ते गए मुझसे फिर एक समय आया जब मैंने फोटोग्राफी किताब हासिल की आवर्ड से सम्मानित किया गया फिर मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिली लगतार आज भी उसी लगन से लगा हुआ आज मेरी पहचान मेरा कैमरा हैं इसके बदौलत आज मेरा घर चल रहा है एक अच्छा लाइफ स्टाइल जी रहा हूं…… आज विश्व फोटोग्राफी दिवस के दिन सभी को हिर्दय से धन्यवाद जिन्होंने मुझे मेरे फोटोग्राफी को सराहा हैं। आशा करता हु सभी बड़ो से अपने बच्चों को फोटोग्राफी में रुचि बढ़वाये या नही लेकिन किसी को हैं तो उससे रोकिये नही